Wednesday, August 15, 2012

Paayal Ki Aawaz

पायल की आवाज आज भी वो फिर से काम करने आई तो मुझे गुस्सा आ गया, मैने बात तक ना की, दरवाजा खुल्ला था...उसने दरवाजे से ही मुझे देखा मैं सो रहा हूँ...तो वो धीरे धीरे कदम रख कर रसोई की तरफ बढ़ी, मैने भी आँखे बन्द ही रखी, लेकिन उसकी पायल की आवाज से मुझे आभास हो रहा था कि वो मैरी तरफ आ रही है...पायल की आवाज तेज सुनाई दी तो मुझे पता चल गया कि वो मेरे करीब आ चुकी है, लेकिन कुछ देर बाद पायल की आवाज बन्द हो गयी, बन्द आँखो में मैं महसूस कर रहा था कि वो मैरे करीब खड़ी है...उसके बदन से बिना पर्फ्यूम वाली खूशबू से ही मैं मदहोश होने लगा, लेकिन गुस्से की वजह से मैंने आँखेँ नहीँ खोली...कुछ देर सन्नाटा रहा...मैं सिर्फ उसकी साँसो की आवाज महसूस करता रहा और उसके बदन की बिना पर्फयूम की मटमैली खुशबू सूँघता रहा...उसके धीरे धीरे दूर जाते कदमों से सन्नाटा टूटा...उसके कुछ देर बाद जोर जोर से बर्तन माँजने की आवाज फिर आखिरी आवाज आई दरवाजा बन्द करने की मानो कोई गुस्से से दरवाजा पटक कर गया हो। लगता है वो बहुत गुस्से मैं थी कि मैने बात नहीँ की...बात करता भी कैसै...मेरे तन बदन मैं राहुल की बातोँ से आग जो लगी हुई थी.. राहुल मेरा पड़ोसी था या फिर ये कहेँ दारु दोस्त...मुम्बई गोरेगाँव फ्लैट मैं वो मेरे ये ठीक नीचे वाले फ्लैट मैं रहता था, जब भी वो मेरे साथ बैठ कर दारु पीता सिर्फ पायल की ही बात करता, उसने पायल को सबसे पहले मेरे यहाँ ही एक दिन सड़ेँ की सुबह बर्तन माँजते देखा...वैसै पायल थी तो 28 साल की लेकिन उसके हु्स्न को देखकर ऐसा लगता था मानोँ अभी अभी अठारवाँ साल चढ़ा हो...कश्मीर की रहने वाली थी...कहती थी कि उसके माँ बाप ने 16 साल की उम्र मैं ही उस की शादी करा दी! पति जम्मू मैं काम करता था! कभी कभी गाँव आता था...लेकिन एक बार बहुत महीने हो गए पर पति नहीँ आया और ना ही उसका फोन, और कुछ दिनोँ बाद जब गाँव का ही एक जम्मू गया तो पता चला कि उसके पति ने किसी कलर्क की बेटी से दूसरी शादी कर ली है... बस फिर क्या था गावँ वाले कुछ कुछ कहने लगे तो पायल चाचा-चाची के पास मुम्बई आ गई औऱ घरों मैं बर्तन माँजने का काम करने लगी ! मेरी सोसाइटी मैं वो चार पाँच घरों मैं बर्तन माँजती थी...जिस मैं सबसे आखिरी मैं थकी हारी वो मेरे घर मैं आती थी....उस दिन सड़े सुबह भी वो बर्तन माँज रही थी...जब दोपहर 12 बजे सो कर उठने के बाद राहुल मेरे फ्लैट मैं अचानक दाखिल हुआ। हमेशा की तरह बिना मेकअप के अपने लबेँ बालोँ को खुला छोड़े, ढीला ब्लाउज पहने ( शायद उसकी चाची का था) आँखे नीचे करके वो बर्तन माँज रही थी और राहुल मेरे साथ गपियाते हुए टेड़ी नजरोँ से उसकी तरफ देख रहा था, बर्तन माँजते हुए ढीले ब्लाउज के बीच पायल के उछलते हुए गोल स्तनोँ का राहुल पर ऐसा असर हुआ कि उसे एक टाँग के उपर दूसरी टाँग रख कर बैठना पड़ा । पायल मेरे लिए सिर्फ एक काम वाली बाई थी और कुछ नहीँ, लेकिन फिर भी ना जाने क्योँ राहुल पायल को घूर रहा था और मैं उसे कुछ देर बाद पायल चली गई और राहुल ने ड्रिंक के ग्लास को टेबल पर रख कर सोफे पर लेटते हुए कहा “यार माँ कसम शैलेश तेरी तो किस्मत बन गई” क्यूँ बे क्या हुआ ? ( मैंने भी चाय के कप को रखते हुए ऐसी टोन मैं पूछा जैसै मुझे कुछ नहीँ समझ आ रहा ) ‘कसम से यार मैंने ऐसा दूध का धुला मखमली पीस आज तक नहीँ देखा’ “ किस पीस की बात कर रहा है तू बै ??? ” मैंने अनजान बनते हुए अपने मुँह पर लगी ड्रिँक पोछते हुए पूछा । यही यार जो अभी अभी तेरे कमरे से गई...(लम्बी साँस भरते हुए) कमस से यार....इसके साथ तो पहली नजर मैं ही मुझे इश्क......( राहुल ये बोलते हुए सोफे पर लेट गया और आसमान की और देखने लगा) ना जाने क्योँ ये सुनते ही मेरे तन बदन मैं आग लग गई लेकिन फिर भी दिखाते हुए मैने ड्रिँक के ग्लास को हाथ मैं उठाया और जौर से ठहाका लगाया “ हा... हा... साला काम वाली बाई का काम करने की सोच रहा है...साले इतना बड़ा मैनेजर है लेकिन ....तू सुधरेगा नहीँ ” ...( ड्रिँक के ग्लास को रखते हुए मैंने उसे मजाकिया तौर पर थप्पड़ा मारा) मैंने ये बोला नहीँ की वो अचानक से अपने सोफे से उठ कर मेरी तरफ आ कर गिड़गिड़ाने लगा “यार एक काम कर ना, उसे मेरे यहाँ भी काम पर लगा दे ना” “ ले ये भी कोई बात है...तू कहे तो आज से ही लगा देता हूँ” मैंने उसे मजाक मजाक मैं हाँ तो कर दी लेकिन ये मेरी लाइफ की भूल थी..शायद सबसे बढ़ी भूल क्योँकि वो सन्डे शायद आखिरी सन्डे था...जब मैं उसके साथ सुकून से शराब पी पाया, क्योकिँ उसके बाद जब भी हम सन्डे को ड्रिँक करने के लिए बैठे तो हाथोँ मैं जाम होता था..लेकिन उसकी बातोँ से मेरा दिल जलता था। वो हमेशा मुझे बताता कि कैसै पायल से वो घन्टे बातेँ करता है..वो पायल को रोज पैंसे भी देने लगा है औऱ उसकी औऱ पायल की बातेँ बिस्तर तक.... इन बातोँ को सुनकर मेरा खून खौल उठता था लेकिन फिर भी मैं उसके सामने ठहाके लगाता था और ताने देता था कि वो काम वाली बाई तक को नहीँ छोड़ता । मैंने राहुल को तो कभी महसूस नहीँ होने दिया कि उसकी इन बातोँ से मुझे कोई फर्क पड़ता है लेकिन हाँ पायल से मैँने बात करनी बिलकुल बन्द कर दी। अब पायल मेरे घर बर्तन माँजने जब भी आती थी तो दो बातेँ होती थी या तो मैं जानबूझकर आँखे बन्द करके सो जाता था या फिर जब भी मुझे जगा हुआ देखकर मुझसे बात करने की कोशिश करती मैं सिर्फ एक ही बात कहता “तुम मेरी नजरोँ से दूर हो जाओ...मुझे तुम से नफरत हो गई है” ऐसा कई दिनोँ तक चलता रहा...वो राहुल के घर बर्तन माँझ कर थकी हुई जब मेरे घर आती तो मैँ उसे छुप छुप कर देखता । उसे देख कर साफ नजर आता था कि किसी ने उसे अभी अभी कपड़े की तरह बुरी तरह धोया है, और निचोड़ा भी है, और वो धुले हुए कपड़ो की तरह गिली भी है जिसे निचोड़ा तो गया है लेकिन सुखाया नहीँ । पर जैसै ही वो मेरी तरफ देखती तो मैं नजर फेर लेता और सिर्फ यही कहता “तुम मेरी नजरोँ से दूर हो जाओ...मुझे तुम से नफरत हो गई है” और वो बिना बोले चली भी जाती..लेकिन इससे पहले मेरा दिल उससे बात करने को करता फिर से सन्डे आ जाता और फिर राहुल दारु पीते हुए मुझे बताता कि इस हफ्ते उसने कैसै नए नए तरीकों से पायल के तन बदन से खेला है इसी बीच मुझे आफिशल टूर से कुछ दिनोँ के लिए मुम्बई से बाहर जाना पड़ गया और मैँने पायल को घर मैं आने से मना कर दिया । और आखिरी वक्त भी जाते हुए यही कहा । “तुम मेरी नजरोँ से दूर हो जाओ...मुझे तुम से नफरत हो गई है” लेकिन राहुल बहुत खुश था मानो उसे घर बैठे जन्नत मिल गई हो...वो रोज बैसब्री से पायल का इन्तजार करता। रोज पायल आती और उसकी हर विश पूरी करती। लेकिन एक दिन राहुल के इन्तजार की घड़िया खत्म हो गई पर पायल नहीँ आई। राहुल को लगा शायद पायल की तबियत खराब हो गई हो इस लिए नहीँ आई क्योकि पायल अमूमन तबियत ठीक ना होने पर छुट्टी ले लेती थी। लेकिन पायल अगले दिन भी नहीँ आई। और ऐसे करते करते एक हफ्ता बीत गया। राहुल की बैचेनी बढ़ रही थी। तरह तरह के ख्याल उसके जहन मैं आने लगे क्योकिँ अब उसे पायल की आदत हो चुकी थी । जब राहुल से रहा नहीँ गया तो उसने आफिस से छुट्टी लेकर पायल के चाचा चाची के घर जाकर पता करने की कोशिश की लेकिन कुछ पता नहीँ चला । पूरे मोहल्ले मैं किसी को भी नहीँ था पता कि पायल किधर चली गई...राहुल ने उन सभी घरोँ मैं पता करने की कोशिश की जहाँ पायल काम करती थी लेकिन कुछ ना हो सका । राहुल की पायल के लिए तड़प बढ़ती ही गई उसने आफिस जाना छोड़ दिया, दिन मैं भी ड्रिँक करना शुरु कर दिया कई दिन बीत गए लेकिन पायल का कुछ पता नहीँ चला। फिर एक दिन सुबह सुबह किसी ने राहुल का दरवाजा खटखटाया...नीँद मैं आँखे मीँजते हुए राहुल ने तोलिया पहनते हुए दरवाजा खोला... “ साहब आप के लिए चिट्ठी” दरवाजे पर खड़े बूढ़े वाजमैन ने सलाम ठोकते हुए कहा राहुल ने चिट्ठी को लिया और दरवाजा बन्द कर दिया, राहुल की खुशी का ठिकाना ना रहा जब उसने देखा की चिट्ठी पायल ने उसे भेजी है। हजारोँ खयाल जहन मैं आने लगे ना जाने चिट्ठी मैं क्या लिखा होगा। राहुल एक कोने मैं सिमट कर बैठ गया और चिट्ठी पड़ने लगा प्रिय राहुल, मैं माफी चाहती हूँ तुम्हे बिना बताए चली आई...मैं दिल्ली आ गई हूँ और यहाँ मैंने शादी भी कर ली है...मेरे पति मुझ से बहुत ज्यादा प्यार करते हैँ, मैं अपने पति के साथ बहुत खुश हूँ लेकिन सिर्फ एक दिक्कत है मेरे पति जब भी मुझे देखते हैँ तो सिर्फ एक ही बात कहते हैँ “तुम मेरी नजरोँ से दूर हो जाओ मुझे तुम से नफरत हो गई है” गिरीश शर्मा डिमरी

3 comments:

  1. ज़हन के आहनी सांचे से जो कही है आपने वो अपनी लयात्मकता की वजह से बेहतर और बेहतरीन बन पड़ी है।
    आपकी कहानी से पहली बार का सामना है इसलिए आलोचना की गुंजाईश अगली बार बनेगी।
    शुभकामनाएं :-)

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  2. good one dear... keep it up
    Nav-Varsh ki shubhkamnayein..
    Please visit my Tech News Time Website, and share your views..Thank you

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