जरा गौर कर..तू कहाँ है....क्या है तेरी हकीकत...
अगर सम्भल गया तो समझो खुदा की है गनीमत
भूल जा अपने आप को ..याद रख सिर्फ उस फरियाद को...
जो तो खुदा से करता था...
जब दो वक्त की रोटी के लिए मरता था...
वक्त ने ये वक्त दिया है....इस वक्त को वक्त जाने से पहले अपना बनाले...
वक्त आ गया है,,,तू जला एक बार फिर से जुनून और जज्बे की मशाले
वक्त आ गया है...
Thursday, October 7, 2010
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